आज 7 अगस्त को जहां एक तरफ बेस्ट (BEST) उपक्रम अपना स्थापना दिवस (वर्धापन दिन) मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुलुंड की सड़कों पर इसी बेस्ट बस ने एक बेकसूर महिला की
जान लेकर इस दिन को 'खूनी वर्धापन दिन' में तब्दील कर दिया है। भांडुप, कुर्ला और दादर के
हादसों के बाद अब मुलुंड चेक नाका स्थित महाराणा प्रताप चौक पर कल्याण ज्वेलर्स के
सामने एक और दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां सड़क पार कर रही 56
वर्षीय महिला को मातेश्वरी डिपो की अनियंत्रित बस ने कुचल दिया। बस
का भारी-भरकम दाहिना पहिया महिला के सिर के ऊपर से निकल गया, जिससे उनका शरीर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मौके पर ही सांसें थम
गईं।
मृतका की पहचान, पारिवारिक पृष्ठभूमि
और उजड़ता परिवार
मृतक महिला की पहचान जयश्री भानाजी परमार (उम्र 56 वर्ष) के रूप में हुई है। वह बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के टी-वार्ड स्थित जल आपूर्ति परियोजना (Water Supply Project) विभाग में 'सफाईगार' के पद पर
कार्यरत थीं।
जयश्री जी का मूल निवास नालासोपारा में था। उनके पति का पहले ही देहांत हो
चुका है और वह नालासोपारा में अपने बेटे और बहू के साथ रहती थीं। स्थापना दिवस पर
हुए इस दर्दनाक हादसे ने उनके बेटे-बहू और पूरे परिवार का सहारा छीन लिया है।
हादसे की पूरी सच्चाई
नेरुल बस स्टेशन से मुलुंड चेक नाका आ रही मातेश्वरी डिपो की बस (रूट नंबर C-512/35,
बस नंबर 8035, RTO नंबर MH-01-EM-1891)
दोपहर 2:30 बजे महाराणा प्रताप चौक के ट्रैफिक
सिग्नल पर रुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जब पैदल यात्रियों के लिए सिग्नल हरा था और लोग रास्ता पार कर रहे थे,
तभी सिग्नल हरा होते ही बस चालक ने बिना ध्यान दिए तेजी से गाड़ी
आगे बढ़ा दी। बस का अगला दाहिना हिस्सा टकराने से जयश्री जी सड़क पर गिरीं और बस
का टायर उन्हें रौंदता हुआ निकल गया।
घटना के तुरंत बाद कंडक्टर शैलेश वाघ (उम्र 26 वर्ष) ने 100 नंबर पर पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने
एम्बुलेंस से उन्हें तुरंत अग्रवाल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन
डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मुलुंड पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस
निरीक्षक संतोष घाटेकर के अनुसार, डोंबिवली निवासी बस चालक
रवि भगवंत भोईसे (उम्र 33 वर्ष) को हिरासत में लेकर बस को
जब्त कर लिया गया है और आगे की कानूनी जांच जारी है।
ग्राउंड रिपोर्ट: ठेकेदारी और भ्रष्टाचार का काला सच
इस हादसे से एक बार फिर बेस्ट की ठेका प्रथा (Wet
Lease) और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है:
1.
स्थापना
दिवस पर सुरक्षा का खोखला दावा: एक तरफ बेस्ट अपनी उपलब्धियों का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसी के स्थापना दिवस पर अनियंत्रित बसों के कारण सड़कें
लाल हो रही हैं और पैदल यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
2.
कम
पगार में अनस्किल्ड ड्राइवरों की भर्ती: बेस्ट के पक्के ड्राइवरों को जहां 40,000
से 1 लाख रुपये तक पगार मिलती थी, वहीं प्राइवेट ठेकेदार कंपनियां महज 16,000 से 18,000
रुपये में बिना ट्रेनिंग वाले चालकों को गाड़ियां सौंप रही हैं।
क्या इन ड्राइवरों के पास भारी वाहन चलाने का अनुभव और वैध लाइसेंस है या केवल
बाइक-कार चलाने वालों को इतनी बड़ी बसें थमा दी गई हैं?
3.
ट्रैफिक
सिग्नल की सरेआम धज्जियां: मुलुंड में 402 नंबर रूट की
बसें हों या C-512, ठेके की बसें लाल बत्ती होने के बावजूद
गाड़ियां बाइक की तरह लहराते हुए भगाती हैं और लोगों की जान जोखिम में डालती हैं।
4.
किराए
में बढ़ोतरी और विज्ञापनों का खेल: बेस्ट का न्यूनतम किराया 5 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये कर दिया गया और विज्ञापनों
से करोड़ों की आय होती है, फिर भी घाटा दिखाकर ठेका प्रथा के
नाम पर जनता की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
बीएमसी में फैले अन्य घोटालों का कनेक्शन
यह हादसा बीएमसी प्रशासन की उस घोर लापरवाही का नतीजा है जो अन्य विभागों में
भी साफ दिखती है:
- मुलुंड का फर्जी डॉक्टर घोटाला:बीएमसी में एमबीबीएस और एमडी डॉक्टरों के नाम पर ठेके दिए गए, लेकिन अस्पतालों में फल-सब्जी बेचने वालों और बारडांसरों को फर्जी डॉक्टर बनाकर करोड़ों का घोटाला किया गया। एसीबी ने क्राइमपीआई को लाखो उपये घूस लेते पकड़ा, उसके बाद उस केस मेंकोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी, और सरे मुख्य गुनहगार मस्त बलपर रह है औरफिर्यादी को परिवार सहित मरने की धमकिय आती है लेकिन पोलिस उस फिर्यदिकोसुरक्षा भी नहीं दे रही ना उन धमकी देने वलोपे कार्य वाही करती है इस केस मेंभी शंका है कई करोडो या अरबो रुपयों का खेल है और शायद कई वादे नेता यामिनिस्टर भी शामिल हो सकते है।
- बीएमसी ओ सी और बिल्डर घोटाला:खुद को बिल्डिंग अधिकारी, टाउन प्लानर और डेवलपर जोबिल्डरों को 'फ़ुल ऑक्यूपेंसीसर्टिफ़िकेट' प्रमाण-पत्र जारी करतेहैं। बताकर एक महिला ने 100 से अधिक पुलिसऔर कोर्ट कर्मियों और सामान्य जनता और व्यापारी को सस्ते फ्लैट का झांसा देकरकरोडो का घोटाला किया जो लालच आया तो सही नहीं तो भगवन का प्रसाद खिलाकरवशीकरण से चेक लेती थी जिसका केस आजभी मुंबई हाई कोर्ट,सेशन कोर्ट, पनवेल कोर्ट , मुलुंड कोर्ट, ठाणे कोर्ट और न जाने कितने कोर्ट में केस चल रहे है उसके पीछे भीकोई नेता या मिनिस्टर का हाथ होने की शंका है ।
पत्रकारिता के तीखे सवाल:
- क्या बीएमसी और सरकार मृतक जयश्रीपरमार के बेटे या परिवार के किसी सदस्य को तुरंत अनुकंपा के आधार पर पक्कीनौकरी देगी?
- क्या बेसहारा हुए पीड़ित परिवारको बेस्ट और सरकार की तरफ से उचित मुआवजा मिलेगा?
- क्या केवल ड्राइवर पर केस दर्ज करखानापूर्ति होगी या फिर ठेका देने वाली कंपनियों और भ्रष्ट अधिकारियों पर भीआपराधिक मामला दर्ज होगा?
(विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: पत्रकार नितिन मणियार - पावर 24 न्यूज भारत / PNR न्यूज भारत)