Sunday, September 20, 2026


पवित्र कलावा (मौली) की पारंपरिक कलात्मकता: नयनाबेन देढ़िया के घर भावी बहु ने सजाया बाप्पा का भव्य दरबार

 


विशेष समाचार रिपोर्ट

गणेशोत्सव के शुभ अवसर पर नयनाबेन देढ़िया के निवास स्थान पर 1.5 दिन के 'घरगुती गणपति' का बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ आगमन हुआ। इस बार का उत्सव परिवार के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि हाल ही में सगाई के बंधन में बंधी उनकी होने वाली बहु ने अपने हाथों से बाप्पा के स्वागत के लिए यह सुंदर और अनोखा मंडप तैयार किया है।

सजावट की खासियत:

इस मंडप की सजावट में भारतीय संस्कृति और पवित्रता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। बहु ने लाल और पीले रंग के पवित्र कलावा (मौली धागे) का जाल बनाकर एक बेहद कलात्मक बैकड्रॉप और छतरी तैयार की है। इसके ऊपर शुभ 'ॐ' के प्रतीक, लटकती हुई छोटी पीतल की घंटियाँ, मोतियों की मालाएँ और रंग-बिरंगे फूलों की लड़ी लगाई गई हैं। खंभों पर पारंपरिक ढोल बजाते नर्तकों की आकृतियाँ और ऊपर जलते दीये पूरे माहौल को अत्यंत आध्यात्मिक और मांगलिक बनाते हैं।

मूर्ति की अलौकिक विशेषता:

सिंहासन पर विराजे बाप्पा का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और कल्याणकारी है। गुलाबी रंग की आभा वाली बाप्पा की यह प्रतिमा भव्य मुकुट, पीले-लाल वस्त्रों और गले में लटकती सुंदर पुष्प मालाओं से सुशोभित है। बाप्पा के शांत, दयालु चेहरे और आशीर्वाद देती हुई मुद्रा से घर में एक सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा का संचार हो रहा है।

नयनाबेन देढ़िया के घर आए सभी रिश्तेदारों और दर्शनार्थियों ने बाप्पा का आशीर्वाद लिया और अपनी होने वाली बहु द्वारा मौली धागों से की गई इस अनूठी व भक्तिमय सजावट की भूरि-भूरि प्रशंसा की।


 


भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप में विराजे पर्यावरण-अनुकूल गणपति बाप्पा:  यक्ष अमित ठक्कर की बाल-कृष्ण थीम और साडू माटी का सराहनीय संदेश



विशेष समाचार रिपोर्ट

गणेशोत्सव के पावन अवसर पर अमित, मेघा और यक्ष ठक्कर के निवास स्थान पर 1.5 दिन के 'घरगुती गणपति' बड़ी ही श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ विराजे। इस वर्ष उनके घर की सजावट और बाप्पा का दिव्य स्वरूप पूरे क्षेत्र में चर्चा और प्रेरणा का केंद्र बना रहा।

बाल-कृष्ण थीम सजावट की खासियत:

इस सुंदर सजावट को यक्ष अमित ठक्कर ने स्वयं अपने हाथों से तैयार किया। उन्होंने बाप्पा के लिए श्री कृष्ण जी की विशाल छवि और कल्पवृक्ष के बैकड्रॉप के साथ एक अलौकिक वातावरण रचा। चारों ओर हरी-भरी पत्तियों, रंग-बिरंगे फूलों के फ्रेम और ऊपर बादलों जैसा अहसास देने वाली मनमोहक लाइटिंग से सजा यह मंडप ऐसा प्रतीत होता है मानो बाप्पा स्वयं वृंदावन के पावन धाम में विराजे हों।

शादू माटी (पर्यावरण-अनुकूल) मूर्ति की विशेष महत्वता:

अमित ठक्कर जी के घर विराजे गणपति बाप्पा की सबसे बड़ी और पवित्र विशेषता यह थी कि यह प्रतिमा पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल साडू माटी (साडू मिट्टी) से निर्मित थी, जिसमें प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया गया था। यद्यपि साडू माटी की मूर्तियाँ आकार में बहुत विशाल नहीं बनतीं, लेकिन इनकी सुंदरता, सौम्यता और जीवंतता देखते ही बनती है।

अमित जी ने पीओपी की मूर्तियों से पूरी तरह दूरी बनाकर एक बेहद सराहनीय और प्रेरणादायक कदम उठाया है। पीओपी की मूर्तियाँ पानी में आसानी से घुलती नहीं हैं, जिसके कारण विसर्जन के अगले दिन चौपाटी, तालाबों और समुद्र तटों पर खंडित मूर्तियों के जो दुखद दृश्य देखने को मिलते हैं, वे हर भक्त के दिल को ठेस पहुँचाते हैं। अमित ठक्कर जी का मानना है कि बाप्पा का अनादर रोकने के लिए हर नागरिक को साडू माटी की ही मूर्तियों का चयन करना चाहिए।

बाल-कृष्ण स्वरूप की अलौकिक छवि:

बाप्पा के मुकुट पर सजे वास्तविक मोरपंख, कानों में कुंडल और सिर पर झूलती केश-लटाएँ उन्हें बाल-कृष्ण का अति-मनमोहक रूप प्रदान कर रही थीं। बाप्पा की सजीव नीली आँखें और चेहरे की निष्पाप मुस्कान इतनी दिव्य थी कि दर्शन करने आए हर श्रद्धालु का मन मोह लेती थी।

मैरीगोल्ड आंगन में भावुक और सम्मानपूर्वक विसर्जन:

दूसरे दिन रात लगभग 10:00 बजे 1.5 दिन के गणेशोत्सव का विसर्जन समय आया। इस अवसर पर अमित जी के पूरे परिवार और उनकी 'मैरीगोल्ड आंगन' इमारत के सभी निवासियों ने मिलकर भक्तिभाव और उल्लास के साथ बाप्पा को विदाई दी। किसी प्राकृतिक जलस्रोत या तालाब में जाने के बजाय, इमारत के पैसेज (आंगन) में ही एक बड़े से बर्तन/टब को शुद्ध जल से भरकर उसमें बाप्पा का पूरे मान-सम्मान के साथ विसर्जन किया गया।

साडू माटी होने के कारण बाप्पा की प्रतिमा कुछ ही समय में जल में पूरी तरह लीन होकर पवित्र माटी में बदल गई। इस पवित्र मिट्टी को इमारत के पेड़-पौधों में अर्पित किया गया तथा हर घर में वितरित किया गया, ताकि बाप्पा की उपस्थिति और उनका आशीर्वाद हमेशा हर घर में बना रहे।

'मैरीगोल्ड आंगन' के निवासियों और दर्शनार्थियों ने यक्ष ठक्कर द्वारा की गई कलात्मक सजावट और अमित जी के इस पर्यावरण-प्रेमी व भक्तिमय प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।


 

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