Tuesday, June 16, 2026

Attention! Watch this video before buying a house in Mulund, or your money will be lost! Collusion between builders, societies, and the BMC? Temple dispute reaches the court!

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सावधान! मुलुंड में घर खरीदने से पहले यह वीडियो जरूर देखें, वरना डूब जाएगा पैसा!

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बिल्डर, सोसाइटी और बीएमसी की मिलीभगत? कोर्ट पहुंचे मंदिर का मामला!

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मुंबई में री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स: विवाद
, कानूनी अड़चनें और मालिकों के अधिकार।

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विकास या विनाश? मुंबई में प्रॉपर्टी विवादों का काला सच!

मुलुंड में 'हनुमान मंदिर' की जमीन पर बिल्डर की नजर: क्या आपकी मेहनत की कमाई खतरे में है?

मुलुंड में जमीन का बड़ा घोटाला: हनुमान मंदिर की जमीन हड़पने की साजिश?

 

विशेष संवाददाता, मुंबई

मुंबई के उपनगर मुलुंड में इन दिनों एक प्रॉपर्टी विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला मुलुंड पश्चिम के डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित नित्यानंद अपार्टमेंट का है, जहाँ जमीन के मालिकाना हक को लेकर खड़े हुए विवाद ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में आस्था, विरासत और कानूनी दांव-पेच का एक ऐसा जाल बुना गया है, जिसने आम निवेशकों की नींद उड़ा दी है।

आस्था और विरासत के साथ खिलवाड़

विवाद के केंद्र में है एक प्राचीन दक्षिणमुखी स्वयंभू हनुमान जी का मंदिर और उसके बगल में स्थित कुछ गैरेज। जमीन के मालिक राजेंद्र शांतिलाल संघवी बताते हैं कि यह पूरी प्रॉपर्टी उनके दादाजी ने दशकों पहले खरीदी थी। राजेंद्र जी का आरोप है कि जिस जमीन पर यह मंदिर और गैरेज स्थित हैं, उसे सोसाइटी और बिल्डरों ने मिलीभगत करके हड़पने की साजिश रची है। उनका कहना है कि मंदिर और गैरेज का हिस्सा पूरी तरह से अलग है, जिसका मालिकाना हक उनके पास है, लेकिन विकास के नाम पर इसे गलत तरीके से दिखाया गया है।

प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बीएमसी (BMC) में जमा किए गए दस्तावेजों और बिल्डिंग प्लान में इस विवादित जगह पर एक गेट दिखा दिया गया है। राजेंद्र जी का दावा है कि न तो उनसे कोई चर्चा की गई और न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया। उन्होंने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में खुद जाकर जानकारी निकाली, तो पता चला कि उनके अधिकारों को नजरअंदाज करते हुए प्लान को आगे बढ़ाया जा रहा है। एक सीनियर पत्रकार के नाते जब हमने इस मामले की गहराई से जांच की, तो यह स्पष्ट होता है कि नियमों को ताक पर रखकर या फिर प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का फायदा उठाकर यह सब किया गया है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

यह मामला न केवल एक परिवार की संपत्ति का है, बल्कि उन आम लोगों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो मुलुंड जैसे इलाकों में अपने सपनों का आशियाना ढूंढ रहे हैं। राजेंद्र संघवी का कहना है कि उन्होंने बिल्डर महेश भाई पटेल को भी सारे कानूनी दस्तावेज दिखाने और मिलकर हल निकालने की पेशकश की थी, लेकिन बिल्डर ने कोई जवाब नहीं दिया। वर्तमान में यह मामला सिटी सिविल कोर्ट में लंबित है।

जवाबदेही का इंतजार

इस पूरे मामले में जब हमने बिल्डर महेश भाई पटेल और सोसाइटी के प्रतिनिधि दीपक जी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की, तो एक तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तो दूसरी तरफ व्यस्त होने का बहाना बनाकर बात टाल दी गई। घंटों बीत जाने के बाद भी उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।

निष्कर्ष

न्याय की उम्मीद में राजेंद्र संघवी ने मंदिर के प्रति अपनी आस्था और कानूनी लड़ाई को हथियार बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन सवाल यह है कि आखिर विकास की इस दौड़ में आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

यदि आप भी मुलुंड के इस क्षेत्र में प्रॉपर्टी में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो सावधान रहें! किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी बारीकियों को समझें, क्योंकि आपकी मेहनत की कमाई किसी गलत फैसले की भेंट चढ़ सकती है।

हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

(डिस्क्लेमर: यह लेख एक पत्रकारिता रिपोर्ट के रूप में तैयार किया गया है। किसी भी प्रॉपर्टी सौदे से पहले कानूनी सलाह अवश्य लें।)

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