Sunday, July 5, 2026

मुलुंड में MSEDCL और Vascon Engineers की बड़ी लापरवाही; मानसून की पहली बारिश में LIC कॉलोनी बनी 'डेंजर जोन'



https://youtu.be/LzaVA4e4i6E

https://x.com/PatrakarNManiar/status/2073754117995118856?s=20

मानसून की पहली बारिश में ही खुली दावों की पोल: मुलुंड वेस्ट की एलआईसी कॉलोनी में MSEDCL और ठेकेदार की लापरवाही से मचा हाहाकार

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सिर्फ 6 दिनों में काम पूरा कर सड़क दुरुस्त करने का लिखित भरोसा दिया था, लेकिन हफ्तों बीतने के बाद भी मलबा और जानलेवा गड्ढे जस की तस।

https://www.powerpublicationstudio.com/post/मुलुंड-में-msedcl-और-vascon-engineers-की-बड-ी-लापरवाही-मानसून-की-पहली-बारिश-में-lic-क-लोनी-बनी-डें

विशेष संवाददाता, मुलुंड (मुंबई) : 05 जुलाई, 2026 :

हर साल मानसून के आते ही बीएमसी और प्रशासनिक गलियारों से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। ऐसा ही एक जीता-जागता और भयानक उदाहरण मुलुंड वेस्ट के डॉ. आर. पी. रोड स्थित एलआईसी कॉलोनी (गिरी विहार एसोसिएशन) में देखने को मिल रहा है। यहाँ महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) और उसके लापरवाह कांट्रैक्टर (मैसर्स वास्कॉन इंजीनियर्स लिमिटेड) की मिलीभगत और घोर लापरवाही ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है।

प्रशासनिक अनुमति की आड़ में निजी रास्तों को खोदकर इस कदर लावारिस छोड़ दिया गया है कि आज एलआईसी कॉलोनी का पूरा इलाका एक 'डेंजर जोन' में तब्दील हो चुका है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार, पुलिस हाउसिंग (एम. जी. रोड पुलिस लाइन मेगा टावर्स) और डॉ. आर. पी. रोड पर पुनर्विकसित हो रहे बीएमसी के एम. टी. अग्रवाल अस्पताल को बिजली आपूर्ति देने के लिए रुनवाल एंथुरियम एमएसईडीसीएल सबस्टेशन से 11 KV (किलोवॉट) की हाई टेंशन (HT) केबल बिछाने का काम चल रहा था। इसके लिए ठेकेदार वास्कॉन इंजीनियर्स ने एलआईसी कॉलोनी के गिरी विहार एसोसिएशन को एक अनुरोध पत्र देकर केवल 6 दिनों के भीतर काम पूरा करने और सड़क को पूर्ववत (पूरी तरह ठीक) करने का लिखित भरोसा दिया था।

लेकिन आज हफ्तों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। केबल तो डाल दी गई, लेकिन पूरी सड़क को जानलेवा गड्ढों, बिखरी हुई मिट्टी और मलबे के ढेर में तब्दील करके ठेकेदार रफूचक्कर हो गया।

ग्राउंड जीरो की भयावह स्थिति: स्विमिंग पूल बना बच्चों का गार्डन

कॉलोनी के जागरूक नागरिकों द्वारा साझा किए गए वीडियो और बयानों से जो हकीकत सामने आई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही ठेकेदार के 'पैचवर्क' की कलई खोल दी है।

·       धंस चुकी हैं सड़कें: केबल बिछाने के बाद गड्ढों को ठीक से भरा नहीं गया, जिसके कारण पूरी सड़क जगह-जगह से धंस गई है। ड्रेनेज लाइनें पूरी तरह चोक हो चुकी हैं, जिससे गंदा पानी सोसायटियों के भीतर घुस रहा है।

·       स्विमिंग पूल बना गार्डन: जिस कॉमन गार्डन में कॉलोनी के छोटे बच्चे खेला करते थे, वह आज पानी से लबालब भरकर एक गहरा स्विमिंग पूल बन चुका है। रुके हुए इस गंदे पानी के कारण इलाके में मलेरिया और डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

·       ऑटो चालकों ने किया आने से इनकार: वरिष्ठ नागरिकों की इस कॉलोनी में अब रिक्शा चालकों ने भी अंदर आने से साफ मना कर दिया है। उबड़-खाबड़ और धंसी हुई सड़कों के कारण गाड़ियां अनियंत्रित हो रही हैं।

स्थानीय निवासियों का फूटा गुस्सा:

"यहाँ से गुजरते समय गाड़ियां स्किड हो रही हैं। पैदल चलने वाले बुजुर्ग और स्कूली बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सड़क पूरी तरह धंस चुकी है और ये लोग केबल को खुला छोड़कर चले गए। अगर किसी को कुछ हो गया, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?"

MSEDCL की चुप्पी और ठेकेदार की बेशर्मी

गिरी विहार एसोसिएशन द्वारा लगातार 18 अप्रैल और 26 अप्रैल 2026 को MSEDCL के मुख्य अधिकारी और उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें भेजी गईं। हैरान करने वाली बात यह है कि ठेकेदार के प्रतिनिधि सचिन शेवड़े ने निवासियों से यह तक कह दिया कि उनके पास काम पूरा करने के लिए मटेरियल (सामग्री) ही उपलब्ध नहीं था!

शिकायत के बावजूद MSEDCL के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अधिकारियों को भेजे गए ईमेल्स तक बाउंस हो रहे हैं, जो विभाग की चरमराई व्यवस्था और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।

वरिष्ठ पत्रकार की टिप्पणी: किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?

यह सीधे तौर पर आम जनता के टैक्स के पैसों का मखौल और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है। जब यह काम पूरी तरह से गैर-कानूनी तरीके से रास्तों को बर्बाद करके किया जा रहा है, तो MSEDCL की विजिलेंस और सिविल टीमें कहाँ सो रही हैं?

प्रशासन से हमारा सीधा सवाल है: क्या एलआईसी कॉलोनी में किसी मासूम की जान जाने या किसी बड़े हादसे के बाद ही आपकी कुंभकर्णी नींद खुलेगी?

हमारी मांग:

MSEDCL तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे, मैसर्स वास्कॉन इंजीनियर्स लिमिटेड के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए और युद्धस्तर पर इस सड़क का सुधारीकरण कर एलआईसी कॉलोनी के निवासियों को इस नारकीय स्थिति से निजात दिलाई जाए। जब तक यह सड़क पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।

इस खबर पर हमारी नजर लगातार बनी रहेगी...


 

महा-खुलासा: 30 करोड़ की महा-ठगी में माकन-मालिक\बिल्डर और BMC का गठजोड़ बेनकाब! 'पटेल मैन्शन' नहीं, यह मुंबई का पहला '60-डे ट्रांजिट कैंप' स्कैम है; 12 साल, 18 पीड़ित परिवार बेघर.


विशेष खोजी रिपोर्ट: विशेष इन्वेस्टिगेटिव ब्यूरो मुंबई, 24 जून, 2026

मुंबई: मरीन लाइन्स के चंदनवाड़ी, गवलीवाड़ी में स्थित 'पटेल मैन्शन' (प्लॉट नंबर 660, 20/D) की परतों को जैसे-जैसे खोदा जा रहा है, वैसे-वैसे मुंबई नगर निगम (BMC) के भ्रष्ट अधिकारियों और तत्कालीन राजनीतिक आकाओं का एक ऐसा संगठित ढांचा सामने आ रहा है जिसने पूरे सिस्टम को पंगु बना दिया था। यह मामला सिर्फ एक जालसाज बिल्डर वाहिद रफिक पटेल (वर्तमान निवासी: फ्लैट नंबर 11, तीसरी मंजिल, निखिल पैराडाइज, नेरल पुलिस स्टेशन के पास, नवी मुंबई) द्वारा परिवारों को ठगने का नहीं है; बल्कि यह सरकारी रिकॉर्ड्स के साथ की गई एक सोची-समझी आपराधिक और तकनीकी धोखाधड़ी है, जो पिछले 12 सालों से लगातार जारी है।

हमारी ताजा खोजी पड़ताल, वरिष्ठ वकीलों की राय और एक्सपर्ट्स के तकनीकी विश्लेषण में कई ऐसे ज्वलंत और सीधे सवाल सामने आए हैं, जो बीएमसी के दावों और प्रशासनिक ईमानदारी की धज्जियां उड़ाते हैं:

1. 2014 का तकनीकी महा-चमत्कार: बिना सीमेंट-कंक्रीट, सिर्फ 60 दिनों में खड़ा हुआ 'I-बीम' का मौत का कुआं!

जांच में यह बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला तकनीकी तथ्य सामने आया है कि साल 2014 में आरोपी वाहिद पटेल ने इस ग्राउंड प्लस 4 मंजिला (G+4) इमारत का निर्माण मरीन लाइन्स जैसे प्राइम लोकेशन पर महज 60 दिनों के भीतर कर दिया था। इस इमारत को बनाने में पारंपरिक सीमेंट, कंक्रीट या मजबूत आरसीसी (RCC) पिलर्स का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया था।

इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस इमारत को लोहे के 'I-बीम' (I-Beam) और रेडीमेड टाइल्स/स्लैब के जरिए ठीक उसी तरह खड़ा किया गया था, जैसे स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) प्रोजेक्ट्स के लिए 'रिहैब ट्रांजिट कैंप' (Rehabs Transit Camp) यानी अस्थायी शेड बनाए जाते हैं।

एक्सपर्ट्स की बड़ी चेतावनी: तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के 'I-बीम' आधारित अस्थायी ट्रांजिट कैंपों की अधिकतम जीवन अवधि (Life Span) महज 5 से 7 साल होती है। इसके बाद इन ढांचों को कानूनी रूप से नष्ट (Destroy) करना अनिवार्य होता है क्योंकि ये ढहने की कगार पर पहुंच जाते हैं। आरोपी ने जानबूझकर ऐसा अस्थायी ढांचा बनाया और उसे स्थाई ओनरशिप जैसी चकाचौंध देकर बेच दिया। आज ठीक 12 साल बाद, सोची-समझी साजिश के तहत इस मियाद पूरी कर चुके ढांचे को नष्ट करने और खाली कराने का खेल खेला जा रहा है।

यह पूरी साइट 4 बिल्डिंग्स वाली एक कॉमन सोसाइटी के गेट के अंदर स्थित है। निर्माण के समय (2014 में) आसपास के सजग निवासियों और बगल की इमारतों के लोगों ने इस जानलेवा और अवैध निर्माण पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं और विरोध प्रदर्शन किया था। लेकिन, सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन रसूखदार राजनीतिक नेताओं के सीधे हस्तक्षेप और प्रभाव के कारण विरोध करने वाले स्थानीय लोगों की आवाज को पूरी तरह से दबा दिया गया।

2. नाक के नीचे अंधेरगर्दी: बीएमसी सी-वार्ड (BMC C-Ward) से महज 2 मिनट की दूरी पर हुआ महा-घोटाला!

इस पूरे मामले का सबसे शर्मनाक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह तथाकथित 'पटेल मैन्शन' स्थानीय बीएमसी सी-वार्ड (BMC C-Ward) कार्यालय से महज 2 मिनट की पैदल दूरी (Walking Distance) पर स्थित है। यह बात बीएमसी के प्रशासनिक तंत्र पर सबसे बड़ा तमाचा है। जिस वार्ड ऑफिस के अधिकारियों, फ्लाइंग स्क्वाड और बीट इंजीनियरों की जिम्मेदारी अपने इलाके में होने वाले हर एक अवैध निर्माण पर नजर रखने की होती है, उनकी ठीक नाक के नीचे, महज दो मिनट की दूरी पर एक पूरी अवैध G+4 इमारत खड़ी हो जाती है और अधिकारी 'अंधे और बहरे' बने रहते हैं। यह दूरी साफ साबित करती है कि यह कोई चूक नहीं थी, बल्कि बीएमसी अधिकारियों की मर्जी और पूरी सरपरस्ती में खेला गया संगठित आर्थिक अपराध था।

3. फ्लैट्स का गणित: 18 परिवार भुगत रहे हैं प्रताड़ना, 2 फ्लैट्स बिल्डर के खुद के कब्जे में!

इस पूरी इमारत में कुल मिलाकर 20 फ्लैट्स तैयार किए गए थे, जिनमें से प्रत्येक फ्लैट महज 180 वर्ग फुट (Self-Contained) का था। इस पूरे खेल का गणित इस प्रकार है:

  • 18 फ्लैट्स बेचे गए (Sold): बिल्डर वाहिद पटेल ने चालाकी से इन 18 फ्लैटों को 'टेनेंसी राइट्स' के नाम पर मध्यमवर्गीय परिवारों को बेच दिया। आज ये 18 परिवार पूरी तरह से सड़क पर आ चुके हैं और भयानक मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना भुगत रहे हैं।
  • 2 फ्लैट्स अनसोल्ड (In Landlord's Possession): इमारत के बचे हुए 2 फ्लैट्स को बिल्डर ने नहीं बेचा और वे आज भी खुद बिल्डर के निजी कब्जे में हैं।

4. ऑन-पेपर 'मलबे' पर खड़ी हुई रेंट एग्रीमेंट और सरकारी दस्तावेजों की जादुई दुनिया

दस्तावेजों का सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि साल 2014 में ही बीएमसी (BMC) ने इस अवैध निर्माण को गिराने के लिए 'पुल डाउन नोटिस' (Pull Down Notice) जारी किया था। नगर निगम के रिकॉर्ड्स का दावा है कि 29 जनवरी 2015 को इस अनधिकृत ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त (Demolished) कर दिया गया था।

अब यहां खोजी पत्रकारिता का सबसे तीखा सवाल खड़ा होता है: अगर बीएमसी के रिकॉर्ड में यह बिल्डिंग 2015 में "मलबे में तब्दील" दिखाई गई थी, तो उसी साल (2015 में) आरोपी वाहिद पटेल ने बिना किसी डर के उन्हीं 18 फ्लैट्स को बाजार में कैसे बेच दिया?

उससे भी गंभीर बात यह है कि इन अवैध घोषित किए जा चुके फ्लैटों का बकायदा सरकारी स्टैम्प ड्यूटी भरकर बीएमसी के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में बकायदा रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) किया गया। एक अवैध घोषित और कागजों पर ध्वस्त बिल्डिंग के सेल डीड और एग्रीमेंट सरकारी दफ्तर में कैसे रजिस्टर्ड हो रहे थे? यही नहीं, इस तथाकथित ध्वस्त इमारत को बकायदा बिजली के वैध कनेक्शन दिए गए। यहां रहने आए इन 18 परिवारों को सरकारी विभागों द्वारा बकायदा राशन कार्ड, इलेक्शन कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) और अन्य आधिकारिक सरकारी दस्तावेज (Aadhaar Card) तक जारी कर दिए गए।

साल 2015 के दौर में जहां मुंबई के तमाम वैध और नए प्रोजेक्ट्स को कड़े 'ओनरशिप रजिस्ट्रेशन' (Ownership) नियमों के तहत रजिस्टर किया जा रहा था, वहां इस 180 वर्ग फुट के अस्थायी शेडनुमा कमरों को केवल टेनेंसी राइट्स के नाम पर बेचने और रजिस्टर्ड होने की छूट क्यों और किसके इशारे पर दी गई?

5. बेनामी जमीन और राजनीतिक पार्टनरशिप का बड़ा सवाल: जांच का मुख्य विषय

इस पूरे नेक्सस के पीछे सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल यह है कि वाहिद पटेल ने आखिरकार वह मरीन लाइन्स जैसी बेशकीमती जमीन हासिल कैसे की?

  • क्या उसने यह जमीन किसी से वैध तरीके से खरीदी थी?
  • क्या यह कोई जॉइंट वेंचर (JV) प्रोजेक्ट था?
  • या फिर इस प्राइम लोकेशन की जमीन को विशुद्ध रूप से तत्कालीन राजनीतिक संरक्षण और बाहुबल के दम पर कब्जाया गया था?

पीड़ित निवेशकों और स्थानीय सूत्रों का सीधा आरोप है कि क्या उस समय के कुछ बड़े राजनीतिक नेता इस पूरे प्रोजेक्ट में परदे के पीछे से हिस्सेदार (Partners) थे? क्या नेताओं और बीएमसी अफसरों ने मिलकर मध्यमवर्गीय परिवारों को लूटने का यह सुनियोजित ताना-बाना बुना था? यह एक ऐसा गहरा विषय है जिसकी जांच केवल स्थानीय पुलिस स्तर पर नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय वित्तीय अपराध शाखा (EOW) या विशेष जांच दल (SIT) द्वारा होनी चाहिए। अंदेशा तो यह भी है कि तत्कालीन BMC C-वार्ड के अंतर्गत इसी तरह के कई और अवैध अस्थायी प्रोजेक्ट्स भी इन्हीं राजनीतिक आकाओं की छत्रछाया में बनाए और बेचे गए होंगे।

12 साल की प्रताड़ना, मेट्रो का बहाना और आज की वित्तीय हकीकत

साल 2015 में जिन 18 परिवारों ने औसतन 47 लाख रुपये प्रति फ्लैट (कुल मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपये स्टैम्प ड्यूटी समेत) इस उम्मीद में लगाए थे कि उन्हें मुंबई में अपना आशियाना मिलेगा, वे आज 2026 में पिछले 12 सालों से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

साल 2019 से 2021 तक जब लोग वहां रहने लगे, तो बिल्डर वाहिद पटेल ने मुंबई मेट्रो (MMRCL) के भूमिगत काम से होने वाले कंपनों को ढाल बनाकर मई 2021 में एक और नया जाल बुना। उसने मासूम किरायेदारों से कहा, "बिल्डिंग को खतरा है, आप लोग 1 साल के लिए खाली कर दो, मैं मरम्मत कराकर दूंगा।" मासूम परिवार झांसे में आ गए। बिल्डर ने 6 महीने का किराया (90-90 हजार रुपये) देकर हाथ खींच लिए। इसके बाद दिसंबर 2021 में बीएमसी ने इस अवैध बिल्डिंग की बिजली और पानी के कनेक्शन हमेशा के लिए काट दिए। हद तो तब हो गई जब निवेशकों को पता चला कि इस जालसाज बिल्डर ने इसी अवैध प्रॉपर्टी पर कोंकण मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक (मझगांव ब्रांच) से 1.5 करोड़ रुपये का लोन भी उठा लिया और डिफ़ॉल्ट कर गया, जिसके बाद बैंक ने कुर्की के नोटिस चिपका दिए।

आज 2026 के मार्केट इंडेक्स के हिसाब से इस प्रॉपर्टी और डूबी हुई रकम की वैल्यू 3 गुना से भी ज्यादा (लगभग 30 करोड़ रुपये) हो चुकी है। इन परिवारों ने न सिर्फ अपनी पूंजी खोई, बल्कि वे बेघर हो गए।

पुलिस केस को मजबूत करने का रास्ता: वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार आवश्यक BNS धाराएं

एल.टी. मार्ग पुलिस ने जो एफआईआर (No. 0685/2026) केवल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (Cheating) के तहत दर्ज की है, उसे तुरंत अपग्रेड करना होगा। इस केस को 'कमजोर' से 'लोहे जैसा मजबूत' बनाने के लिए कोर्ट और पुलिस कमिश्नर के समक्ष निम्नलिखित धाराएं जोड़ने की अर्जी देना अनिवार्य है:

 

 

1.      धारा 316(5) BNS (आपराधिक विश्वासघात - Criminal Breach of Trust): चूंकि आरोपी को एक 'करारपत्रक' के तहत कमरों का कब्जा केवल मरम्मत के उद्देश्य से सौंपा गया था, और उसने उस भरोसे को तोड़कर कब्जे को अपने पास रख लिया और प्रॉपर्टी पर गुप्त लोन लिया, इसलिए यह गंभीर श्रेणी का विश्वासघात है, जिसमें अधिकतम उम्रकैद तक का प्रावधान है।

2.    धारा 336(3) और धारा 340(2) BNS (फर्जी दस्तावेज बनाना और इस्तेमाल करना - Forgery): सरकारी उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में अवैध घोषित इमारत को वैध दिखाकर पंजीकृत कराना और बैंक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 1.5 करोड़ का लोन पास कराने के कारण ये धाराएं सीधे तौर पर लागू होती हैं।

3.    धारा 61(2) BNS (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी - Criminal Conspiracy): 60 दिनों में बिना सीमेंट के G+4 बिल्डिंग खड़ी करना, बीएमसी का आंखें मूंदना, और पुलिस शिकायत को दबाना बिना सोची-समझी आपराधिक साजिश के मुमकिन नहीं है। इस मामले में साल 2014-15 के दौरान तैनात रहे बीएमसी सी-वार्ड के संबंधित बीट अधिकारियों, बिल्डिंग प्रपोजल विभाग के इंजीनियरों और उन अज्ञात राजनीतिक आकाओं को सह-आरोपी बनाया जाए जिन्होंने जनता की आवाज दबाई थी।

पैसे की शत-प्रतिशत रिकवरी का फॉर्मूला:

कानूनन पीड़ितों का पैसा सिर्फ बिल्डर वाहिद पटेल की निजी संपत्तियों को कुर्क करके ही नहीं, बल्कि उन बीएमसी अधिकारियों और रजिस्ट्रार ऑफिस के कर्मचारियों की निजी संपत्तियों को बेचकर भी वसूला जाना चाहिए, जिन्होंने अपनी आधिकारिक ड्यूटी में जानबूझकर कोताही बरती, कागजों पर झूठी डिमोलिशन रिपोर्ट बनाई और इस महा-धोखाधड़ी को फलने-फूलने का मौका दिया।

संपादकीय टिप्पणी: 'पटेल मैन्शन' कोई साधारण चीटिंग का केस नहीं है, यह मुंबई के रीयल एस्टेट के इतिहास का एक ऐसा काला प्रशासनिक फ्रॉड है जहां सरकारी रजिस्ट्रार, बीएमसी (जो महज 2 मिनट की दूरी पर मूकदर्शक बनी रही), राजनीतिक संरक्षण और बिल्डर ने मिलकर 18 परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी। अब वक्त आ गया है कि 2026 में इन अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाए और पीड़ितों को उनकी पाई-पाई ब्याज और आज की मार्केट वैल्यू (3 गुना रकम) के साथ वापस मिले।


Wednesday, July 1, 2026

Congress Demands Education Minister’s Resignation Over NEET 2026 Paper Leak, Slams ‘Systemic Betrayal’.


Mumbai – 29th June 2026 :

The Congress today launched a blistering attack on the Modi government over the NEET 2026 paper leak, demanding the immediate resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan on moral grounds.

Addressing a press conference at Balkan-ji-Bari Hall, Ghatkopar, AICC Spokesperson Charan Singh Sapra called the leak a "direct betrayal of lakhs of students". He slammed the Centre’s “insensitive” refusal to take accountability or express condolences for nearly 20 student suicides reported across India after the exam cancellation.

“The system has collapsed. Nearly 80 paper leaks have occurred under the Modi government - TET being the latest. This isn’t incompetence, it’s sabotage,” Sapra said. “Instead of experts, the education system is now run by RSS and BJP stooges. Congress will not be a mute spectator to this destruction of our youth’s future.”

The Youth Congress and NSUI are leading nationwide protests demanding Pradhan’s resignation. In Mumbai, the party has launched press conferences across all Lok Sabha segments to amplify the “Chatron Ki Goonj” student movement, sparked by Rahul Gandhi’s recent student interaction in Kota.

“We are committed to a transparent, credible exam system and will fight until this rotten structure is overhauled,” said Ketan Shah, President, North East Mumbai District Congress Committee, who organised the Ghatkopar press meet.

Mumbai Congress leaders Suresh Koparkar, Brijmohan Sharma, Rakesh Shetty, Rajesh Ingle, Javed Chaugule, Bhushan Desai and others were present at the Press Conference.


 

Tuesday, June 30, 2026

NEET 2026 पेपर लीक पर कांग्रेस की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, इसे 'व्यवस्थागत विश्वासघात' करार दिया।

NEET 2026 पेपर लीक पर कांग्रेस की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, इसे 'व्यवस्थागत विश्वासघात' करार दिया।

मुंबई – घाटकोपर : 29 जून 2026

कांग्रेस ने आज NEET 2026 पेपर लीक को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है और नैतिक आधार पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।

घाटकोपर के बाल्कन-जी-बारी हॉल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, AICC के प्रवक्ता चरण सिंह सपरा ने पेपर लीक को "लाखों छात्रों के साथ सीधा विश्वासघात" बताया। उन्होंने परीक्षा रद्द होने के बाद पूरे भारत में रिपोर्ट की गई लगभग 20 छात्रों की आत्महत्याओं पर जवाबदेही तय करने या संवेदना व्यक्त करने से इनकार करने के लिए केंद्र सरकार की " असंवेदनशीलता" की कड़ी आलोचना की।

सपरा ने कहा, "व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मोदी सरकार के कार्यकाल में अब तक लगभग 80 पेपर लीक हो चुके हैं, जिसमें TET सबसे ताज़ा मामला है। यह अक्षमता नहीं, बल्कि सुनियोजित तोड़फोड़ (सबोटेज) है। शिक्षा प्रणाली अब विशेषज्ञों के बजाय RSS और BJP के चहेतों द्वारा चलाई जा रही है। कांग्रेस हमारे युवाओं के भविष्य की इस बर्बादी पर मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी।"

युवा कांग्रेस और NSUI प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। मुंबई में, पार्टी ने राहुल गांधी द्वारा कोटा में छात्रों के साथ हाल ही में की गई बातचीत से प्रेरित "छात्रों की गूंज" आंदोलन को तेज करने के लिए सभी लोकसभा क्षेत्रों में प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू की है।

घाटकोपर प्रेस मीट का आयोजन करने वाले उत्तर पूर्व मुंबई जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केतन शाह ने कहा, "हम एक पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली के लिए प्रतिबद्ध हैं और तब तक लड़ेंगे जब तक कि इस सड़ी-गली संरचना का कायाकल्प नहीं हो जाता।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई कांग्रेस के सुरेश कोपरकर, बृजमोहन शर्मा, राकेश शेट्टी, राजेश इंगले, जावेद चौगुले, भूषण देसाई और अन्य नेता उपस्थित थे।

क्या आप इस विषय पर किसी और जानकारी या अन्य समाचार रिपोर्टों के बारे में जानना चाहेंगे?


 

Thursday, June 25, 2026

मुलुंड रेलवे स्टेशन से 100 मीटर की दूरी पर हादसे की संभावना!!

मुलुंड: मानसून के आगमन से मुंबईकरों ने राहत की सांस ली है. लेकिन इसी बारिश की वजह से मुलुंड रेलवे स्टेशन से 100 मीटर की दूरी पर रेलवे की जमीन पर दीमक से खोखला हुआ एक पेड़ खतरे की घंटी बन गया है.
मुलुंड पश्चिम रेलवे स्टेशन के झवेर रोड की तरफ वाले एक्ज़िट के पास - रेलवे की सीमा में एक हरा-भरा दिखने वाला पेड़ है जिसका तना दीमक की वजह से पूरी तरह खोखला हो चुका है. भारी बारिश, भूस्खलन या तेज़ हवा के कारण यह कमजोर पेड़ रेलवे पटरी पर गिर सकता है, जिससे रेल यातायात बाधित होगी. साथ ही बगल की इमारतों पर गिरने से जान-माल का नुकसान भी हो सकता है.
पत्रकार और मुलुंड के एक जागरूक नागरिक होने के नाते आज हम इस बात को रेलवे और मनपा के संज्ञान में ला रहे हैं. उम्मीद है रेलवे और मनपा प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेंगे और भविष्य में संभावित हादसे को देखते हुए उचित कार्रवाई करेंगे. सूचना मिलने के बावजूद यदि प्रशासन निष्क्रिय रहा और आनेवाले दिनों में दुर्भाग्य से यह हादसा हो गया तो इसका जिम्मेदार रेलवे प्रशासन और मनपा दोनों होंगे. 


 

Saturday, June 20, 2026

The Cost of Negligence: Parents Pay Lakhs While Drunk Drivers Hold the Wheel


https://youtube.com/shorts/eycvUtl4Xrk?feature=share

Political Shield, Heavy Fees: Drunk Drivers Playing with Students' Lives!

https://www.powerpublicationstudio.com/post/the-cost-of-negligence-parents-pay-lakhs-while-drunk-drivers-hold-the-wheel

 

Political Shield, Heavy Fees: Drunk Drivers Playing with Students' Lives!

 

Arrogance of Wealth or Administrative Corruption? Parents Demand Accountability After

From School Buses to Dumpers : Absolute Lawlessness on Roads; When Will the State Act?

 

PUNE-MUMBAI ROAD SAFETY ANALYSIS: High Fees, Zero Accountability?

 

The Cost of Negligence: Parents Pay Lakhs While Drunk Drivers Hold the Wheel

Pune : 20th June 2026 : Direct Investigative Report.

The shocking incident near Pune's Wadki area on the Hadapsar-Saswad road—where a Modak International School bus packed with 40 innocent children lost balance and hung precariously on the edge of a deep well-is not an isolated case of "bad luck." It is a terrifying symptom of systemic corruption, political arrogance, and complete institutional apathy toward student safety across Maharashtra, India.

While local residents and prompt responders managed to rescue the children without casualties, this miracle shouldn't hide the ugly reality. Across major hubs like Mumbai and Pune, high-profile educational institutes charge astronomical fees in the name of premium infrastructure and safety. Yet, the actual transport operations are outsourced to unchecked third-party contractors.

Patterns of Impunity: From Mira Bhayandar to Kalyan

This is a recurring nightmare for parents across the state. The statistics and police logs reveal a dangerous pattern:

·     The Thane-Mira Bhayandar Shocked: A school bus driver operating completely under the influence lost control and rammed directly into a road divider, leaving primary school children traumatized.

·     The Kalyan Swerving Scare: A swift traffic constable intercepted a school bus ferrying 26 students to a tournament after noticing the vehicle swerving wildly on a clear road. The breathalyzer test confirmed the driver was heavily intoxicated.

·     The Hinjewadi Tragedy: A speeding corporate contract bus driven by a heavily drunk driver lost control, killing three school-going siblings who were simply walking home on the footpath.

Why does this keep happening? Many of these private bus operators and travel agencies enjoy the direct backing of local political heavyweights. Secure behind their "political bosses," these drivers display blatant arrogance (Dada giri) on the roads, knowing their influential connections protect them from routine police checks and immediate termination.

A Systemic Failure: Beyond School Buses

The menace of unchecked, reckless driving extends far beyond school transport. Heavy commercial vehicles-including high-speed construction dumpers, transit mixers, and municipal waste management trucks operating under municipal corporations like the BMC-have turned urban roads into death traps.

Driven by overworked, underpaid, and often intoxicated operators, these massive vehicles navigate tight city lanes with complete disregard for pedestrian life, confident that structural corruption will shield them from severe legal consequences.

Call to Action: Demands for the Maharashtra Government and Political Leaders

The state administration cannot continue to look the away until the next tragedy occurs. We demand immediate, uncompromising policy reforms:

  1. Mandatory Institutional Background Checks: Every high school and college management must independently vet, background-check, and clear every driver before granting transport approval. Relying blindly on third-party contractor words must become a punishable offense.
  2. Zero-Tolerance Breathalyzer Protocols: Daily biometric and breathalyzer checks must be mandated at the source before any school bus, commercial cab, dumper, or municipal waste vehicle turns its key.
  3. Severe Penalties for Political Interference: If a driver is caught operating under the influence, both the vehicle owner and the operating agency must face immediate license cancellation and non-bailable criminal charges under the Bharatiya Nyaya Sanhita, regardless of political affiliation.
  4. Independent Audits of Transport Fees: The Education Department must audit the heavy fees collected by international and private elite schools specifically under the "transportation" head to ensure the capital is spent on real safety features rather than institutional profit.

An Appeal to Passengers and Citizens

Relying solely on an unsupportive system is no longer an option. Every passenger, parent, and commuter must remain highly alert. If you notice a driver swerving, displaying erratic behavior, smell alcohol, or acting aggressively, confront the management immediately, alert the traffic authorities, and refuse to let the vehicle proceed.

Staying quiet out of convenience is a risk to your life. Speak up, report the political bullies, and protect your family before the system fails you again.

This video highlights the alarming incident where a school bus full of children narrowly avoided falling into a 40-foot deep well after hitting a protective pillar in Pune


 

Tuesday, June 16, 2026

Attention! Watch this video before buying a house in Mulund, or your money will be lost! Collusion between builders, societies, and the BMC? Temple dispute reaches the court!

https://youtu.be/gq1GUitNqcw

सावधान! मुलुंड में घर खरीदने से पहले यह वीडियो जरूर देखें, वरना डूब जाएगा पैसा!

https://www.facebook.com/share/v/18k1m32Ewo/

बिल्डर, सोसाइटी और बीएमसी की मिलीभगत? कोर्ट पहुंचे मंदिर का मामला!

https://www.instagram.com/reel/DZpAJLlOM3Y/?utm_source=ig_web_copy_link&igsh=MzRlODBiNWFlZA==



मुंबई में री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स: विवाद
, कानूनी अड़चनें और मालिकों के अधिकार।

https://www.powerpublicationstudio.com/post/attention-watch-this-video-before-buying-a-house-in-mulund-or-your-money-will-be-lost-collusion-be

विकास या विनाश? मुंबई में प्रॉपर्टी विवादों का काला सच!

मुलुंड में 'हनुमान मंदिर' की जमीन पर बिल्डर की नजर: क्या आपकी मेहनत की कमाई खतरे में है?

मुलुंड में जमीन का बड़ा घोटाला: हनुमान मंदिर की जमीन हड़पने की साजिश?

 

विशेष संवाददाता, मुंबई

मुंबई के उपनगर मुलुंड में इन दिनों एक प्रॉपर्टी विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला मुलुंड पश्चिम के डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित नित्यानंद अपार्टमेंट का है, जहाँ जमीन के मालिकाना हक को लेकर खड़े हुए विवाद ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में आस्था, विरासत और कानूनी दांव-पेच का एक ऐसा जाल बुना गया है, जिसने आम निवेशकों की नींद उड़ा दी है।

आस्था और विरासत के साथ खिलवाड़

विवाद के केंद्र में है एक प्राचीन दक्षिणमुखी स्वयंभू हनुमान जी का मंदिर और उसके बगल में स्थित कुछ गैरेज। जमीन के मालिक राजेंद्र शांतिलाल संघवी बताते हैं कि यह पूरी प्रॉपर्टी उनके दादाजी ने दशकों पहले खरीदी थी। राजेंद्र जी का आरोप है कि जिस जमीन पर यह मंदिर और गैरेज स्थित हैं, उसे सोसाइटी और बिल्डरों ने मिलीभगत करके हड़पने की साजिश रची है। उनका कहना है कि मंदिर और गैरेज का हिस्सा पूरी तरह से अलग है, जिसका मालिकाना हक उनके पास है, लेकिन विकास के नाम पर इसे गलत तरीके से दिखाया गया है।

प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बीएमसी (BMC) में जमा किए गए दस्तावेजों और बिल्डिंग प्लान में इस विवादित जगह पर एक गेट दिखा दिया गया है। राजेंद्र जी का दावा है कि न तो उनसे कोई चर्चा की गई और न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया। उन्होंने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में खुद जाकर जानकारी निकाली, तो पता चला कि उनके अधिकारों को नजरअंदाज करते हुए प्लान को आगे बढ़ाया जा रहा है। एक सीनियर पत्रकार के नाते जब हमने इस मामले की गहराई से जांच की, तो यह स्पष्ट होता है कि नियमों को ताक पर रखकर या फिर प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का फायदा उठाकर यह सब किया गया है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

यह मामला न केवल एक परिवार की संपत्ति का है, बल्कि उन आम लोगों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो मुलुंड जैसे इलाकों में अपने सपनों का आशियाना ढूंढ रहे हैं। राजेंद्र संघवी का कहना है कि उन्होंने बिल्डर महेश भाई पटेल को भी सारे कानूनी दस्तावेज दिखाने और मिलकर हल निकालने की पेशकश की थी, लेकिन बिल्डर ने कोई जवाब नहीं दिया। वर्तमान में यह मामला सिटी सिविल कोर्ट में लंबित है।

जवाबदेही का इंतजार

इस पूरे मामले में जब हमने बिल्डर महेश भाई पटेल और सोसाइटी के प्रतिनिधि दीपक जी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की, तो एक तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तो दूसरी तरफ व्यस्त होने का बहाना बनाकर बात टाल दी गई। घंटों बीत जाने के बाद भी उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।

निष्कर्ष

न्याय की उम्मीद में राजेंद्र संघवी ने मंदिर के प्रति अपनी आस्था और कानूनी लड़ाई को हथियार बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन सवाल यह है कि आखिर विकास की इस दौड़ में आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

यदि आप भी मुलुंड के इस क्षेत्र में प्रॉपर्टी में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो सावधान रहें! किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी बारीकियों को समझें, क्योंकि आपकी मेहनत की कमाई किसी गलत फैसले की भेंट चढ़ सकती है।

हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

(डिस्क्लेमर: यह लेख एक पत्रकारिता रिपोर्ट के रूप में तैयार किया गया है। किसी भी प्रॉपर्टी सौदे से पहले कानूनी सलाह अवश्य लें।)

Friday, June 12, 2026

A Calculated Environmental Crime: Citizens Allege Developer Defeated - the Roots on Purpose to Destroy Heritage Tree Under the Guise of an Accident

 

CRIMINAL NEGLIGENCE IN MULUND WEST: Centenarian Tree Collapses Opposite Police Station; Disastrous Piling Work by Niyati Enterprises Triggers Near-Fatal Catastrophe

https://www.facebook.com/share/v/1BLfe4J4Wg/

CRIMINAL NEGLIGENCE IN MULUND WEST: Centenarian Tree Collapses Opposite Police Station; Disastrous Piling Work by Niyati Enterprises Triggers Near-Fatal Catastrophe

https://x.com/PatrakarNManiar/status/2065162653144911880?s=20

A Calculated Environmental Crime: Citizens Allege Developer Defeated - the Roots on Purpose to Destroy Heritage Tree Under the Guise of an Accident

https://youtu.be/a_xNUbMnhg4

Special Correspondence: Mulund - MUMBAI: A horrifying testament to reckless urban development unfolded on N.S. Road today. A majestic, heritage tree - estimated to be well over 100 years old - came crashing down directly opposite the Mulund Police Station, crushing multiple vehicles and completely choking the arterial road.

मुलुंड वेस्ट में बिल्डर की बड़ी लापरवाही: पुलिस स्टेशन के सामने गिरा 100 साल पुराना पेड़; 'नियति एंटरप्राइजेस' की खतरनाक पाइलिंग ने खड़ी की बड़ी मुसीबत

एक सोचा-समझा पर्यावरण अपराध: स्थानीय नागरिकों का आरोप - हादसे का बहाना बनाकर हेरिटेज पेड़ को खत्म करने की थी पूरी प्लानिंग

विशेष संवाददाता: मुलुंड - मुंबई: आज मुलुंड वेस्ट के एन.एस. रोड पर बेलगाम और लापरवाह कंस्ट्रक्शन का एक बेहद डरावना रूप देखने को मिला। मुलुंड पुलिस स्टेशन के ठीक सामने स्थित, करीब 100 साल से भी ज्यादा पुराना एक विशाल ऐतिहासिक पेड़ अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में कई गाड़ियां चकनाचूर हो गईं और यह मुख्य सड़क पूरी तरह ब्लॉक हो गई।

 



Special Correspondence: Mulund - MUMBAI: A horrifying testament to reckless urban development unfolded on N.S. Road today. A majestic, heritage tree - estimated to be well over 100 years old - came crashing down directly opposite the Mulund Police Station, crushing multiple vehicles and completely choking the arterial road.

While the physical blockage has brought Mulund West to a standstill, the underlying cause has sparked absolute fury among local residents. This was no natural disaster; it was a man-made catastrophe waiting to happen.

Preliminary investigations and eyewitness accounts reveal that deep piling work was actively being carried out at same plot - construction site. The developer reportedly dug deep into the earth right next to the centenarian tree without erecting mandatory shoring, retaining walls, or structural supports. Deprived of its foundational soil and structural integrity, the massive tree simply gave way.

A Miraculous Escape: The Red Light That Saved Dozens of Lives

It was a matter of pure, divine intervention that Mumbai is not mourning a massive tragedy today. Moments before the tree collapsed, the traffic signal on N.S. Road - regulating the flow from Mulund Railway Station toward the police station - had turned red.

A sea of commuters, public buses, and pedestrians were held back at the junction, waiting for the light to change. Had that signal been green, the massive trunk and canopy would have flattened moving traffic, undoubtedly resulting in severe casualties and loss of life.

Instead, the tree smashed onto the empty stretch of road, crushing parked four-wheelers, scooters, and a stationary Mulund Police van. The impact was so violent that branches reached across the thoroughfare, damaging the facades of buildings opposite the site.

Who is Accountable? The Names Behind the Negligence

As the Mulund Fire Brigade and local police to cut through the massive timber and clear the road, the community is demanding immediate, non-bailable criminal action. The official project details displayed at the site place the responsibility squarely on the following entities:

  • Developer: Niyati Enterprises
  • IOD Number: P-23610/2024/ (870 And Other)/T Ward/MULUND-W/337/1.
  • Legal Name / Promoter: Mr. Dishang Shah
  • Architect Licensor: Mr. Ankit U. Jain (M/S AR Design Studio)
  • Architect Design: Mr. Rahul Mehta
  • RCC Consultants: ZZ Consultants (Lic No. STR/K/211)

There is a growing, fierce demand from residents and legal experts that the Mulund Police must register a formal FIR invoking sections of criminal negligence and endangerment against Mr. Dishang Shah, Niyati Enterprises, and the entire technical team - including the architects and RCC consultants who failed to oversee safe excavation protocols.

Current Ground Situation and Traffic Alerts

The vital stretch of N.S. Road remains completely paralyzed as emergency crews work against the clock.

  • Total Closure: The road from Diksha Hotel up to Kanya Shala School is strictly closed to all vehicular movement.
  • Diversions in Place: On-duty cops are redirecting all traffic toward Dr. R P Road and M G Road. Expect severe bottlenecks across Mulund West for the next few hours.

A century of history was wiped out in seconds today because a builder chose shortcuts over human safety. The structural damage can be cleared, but the citizens of Mulund are making it loud and clear: those responsible for putting hundreds of innocent lives at risk must face the full force of the law.

We will keep you updated on the filing of the FIR and the progress of the cleanup operations.

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