पवित्र कलावा (मौली) की पारंपरिक कलात्मकता: नयनाबेन देढ़िया के घर भावी बहु
ने सजाया बाप्पा का भव्य दरबार
विशेष समाचार रिपोर्ट
गणेशोत्सव
के शुभ अवसर पर नयनाबेन देढ़िया के निवास स्थान पर 1.5 दिन के 'घरगुती
गणपति' का बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ आगमन हुआ। इस बार का उत्सव परिवार
के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि हाल ही में सगाई के बंधन में बंधी उनकी
होने वाली बहु ने अपने हाथों से बाप्पा के स्वागत के लिए यह सुंदर और अनोखा मंडप
तैयार किया है।
सजावट की खासियत:
इस
मंडप की सजावट में भारतीय संस्कृति और पवित्रता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
बहु ने लाल और पीले रंग के पवित्र कलावा (मौली धागे) का जाल बनाकर एक बेहद कलात्मक बैकड्रॉप और छतरी तैयार की है। इसके ऊपर शुभ 'ॐ' के
प्रतीक, लटकती हुई छोटी पीतल की घंटियाँ, मोतियों की मालाएँ और रंग-बिरंगे फूलों
की लड़ी लगाई गई हैं। खंभों पर पारंपरिक ढोल बजाते नर्तकों की आकृतियाँ और ऊपर
जलते दीये पूरे माहौल को अत्यंत आध्यात्मिक और मांगलिक बनाते हैं।
मूर्ति की अलौकिक विशेषता:
सिंहासन
पर विराजे बाप्पा का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और कल्याणकारी है। गुलाबी रंग की आभा
वाली बाप्पा की यह प्रतिमा भव्य मुकुट, पीले-लाल वस्त्रों और गले में
लटकती सुंदर पुष्प मालाओं से सुशोभित है। बाप्पा के शांत, दयालु
चेहरे और आशीर्वाद देती हुई मुद्रा से घर में एक सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा का
संचार हो रहा है।
नयनाबेन
देढ़िया के घर आए सभी रिश्तेदारों और दर्शनार्थियों ने बाप्पा का आशीर्वाद लिया और
अपनी होने वाली बहु द्वारा मौली धागों से की गई इस अनूठी व भक्तिमय सजावट की
भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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